Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
अहमेकोऽहमात्मास्मीत्येकां भावय भावनाम् ।
तया भावनया युक्तः स एव त्वं भवस्यलम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, मैं अद्वितीय शिवरूप देव हूँ, वही देवस्वरूप अद्वितीय शिव तुम्हारे अहंकार से उपलक्षित,
नित्य, अपरोक्ष, चिदेकरस-स्वरूप मैं ही हूँ, यों एकमात्र अविच्छिन्न स्मृतिधारा की तुम भावना करो।
उस प्रकार की देवपूजारूप भावना से ही युक्त हुए तुम अवश्य ही उक्त शिवरूप हो जाओगे, दूसरी
बाह्य-पूजा से नहीं