Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
एकाभावादभावोऽत्र एकत्वद्वित्वयोर्द्वयोः ।
एकं विना न द्वितीयं न द्वितीयं विनैकता ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ पर एक वस्तु का अभाव होने से एकत्व और द्वित्व
दोनों का भी अभाव हे, क्योकि एक के बिना द्वितीय नहीं होता और द्वितीय के बिना एकता नहीं होती