Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 37, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
यामपक्षदिनप्रेक्षाकटाक्षोद्भासिताम्बरम् ।
मज्जनोन्मज्जनव्यग्रकुलाद्रिकुलशेखरम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस नृत्य में आकाशमण्डल याम, पक्ष, दिन आदि प्रक्षण-
कटाक्षो से जगमगा रहा है । तिरोधान और उद्घाटन से व्यग्र कुलपर्वतरूप सिर के अग्रभाग के भूषण
उसमें शोभित होते हैं