Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रमनुभूत्यात्मा सर्वगः सर्वसंश्रयः ।
घटे पटे वटे कुड्ये शकटे वानरे स्थितः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
वही देव घट में, पट में, वट में, दीवार में, शकट में
ओर वानर में स्थित है । यही परमदेव शिव, हर, हरि, ब्रह्मदेव, इन्द्र, कुबेर और यम स्वरूप है