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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

सर्वतो मननातीतं सर्वतः परमं शिवम् । सर्वदा सर्वकर्तारं सर्वसंकल्पितार्थदम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

निरन्तर समस्त पदार्थो के कर्ता, सबको अपने-अपने संकल्पो के अनुसार समस्त पदार्थो का प्रदान करनेवाले, सब भूतो के भीतर रहनेवाले और सभी के एकमात्र साधन अर्थात्‌ सत्तास्फूर्ति प्रदान करनेवाले सर्वस्वरूप उस आत्मदेव का चिन्तन करना चाहिए