Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
सर्वभूतान्तरावस्थं सर्वं सर्वैकसाधनम् ।
इति संचिन्त्य देवेशमर्चयेद्विधिवत्ततः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त प्रकार से ध्यानकर तदनन्तर उस देवाधिदेव की
विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए । हे ब्रह्मज्ञो मे श्रेष्ठ महर्षे, अब मेरे द्वारा वक्ष्यमाण उस देव की पूजा का
यह विधान तुम (सावधान होकर) सुनो