Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
न दीपेन न धूपेन न पुष्पविभवार्पणैः ।
नान्नदानादिदानेन न चन्दनविलेपनैः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
न तो अन्नदान आदि दानां से, न चन्दन के विलेपनं से, न कुंकुम, कर्पूर एवं नैवेद्य से ओर
न इतर यानी छत्र, चवर, दर्पण आदि के समर्पण से ही इस देव की पूजा की जा सकती है