Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
न च कुङ्कुमकर्पूरभोगैश्चित्रैर्न चेतरैः ।
नित्यमक्लेशलभ्येन शीतलेनाऽविनाशिना ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे,
किसी भी प्रकार के कष्ट के बिना प्राप्त होने योग्य शीतल, अविनाशी अमृतस्वरूप एकमात्र स्वरूप के
बोध से यानी साक्षात्कारात्मक अखण्डवृत्ति के प्रवाह में प्रतिबिम्बित स्वात्मस्वरूपवबोध से ही सदा इस
देव की पूजा की जा सकती है