Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
नित्यमेव शरीरस्थमिमं ध्यायेत्परं शिवम् ।
सर्वप्रत्ययकर्तारं स्वयमात्मानमात्मना ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर
में स्थित, सन्निधिमात्र से समस्त ज्ञानं के उत्पादक एवं बोधक परमकल्याणस्वरूप इस आत्मेव का
अपने अन्तःकरण से नित्य ही ध्यान करना चाहिए