Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
न वाञ्छता न त्यजता दैवप्राप्ताः स्वभावतः ।
सरितः सागरेणेव भोक्तव्या भोगभूमयः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
अप्राप्त वस्तु की
इच्छा न करता हुआ और प्राप्त वस्तु को न छोड़ता हुआ स्वभावतः देव से प्राप्त सुखदुःख के हेतुभूत
विषयों का उस प्रकार अविकृत होकर उपभोग करे, जिस प्रकार अविकृत होकर समुद्र नदियों का
उपभोग करता है (70)