Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियायोगाद्यदुपैति शुभाशुभम् ।
अविकारं गृहीतेन तेनैवात्मानमर्चयेत् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
देश, काल ओर कर्म के सम्बन्ध से शुभ या अशुभ जो भी कोई वस्तु प्राप्त हो जाती है, किसी प्रकार की
विकृति के बिना गृहीत उसी वस्तु से आत्मदेव का पूजन करे