Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
यावत्किंचिदिदं वस्तु नाना नात्मावगम्यताम् ।
क्रमा गुरूपदेशाद्या नात्मज्ञानस्य कारणम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव गुरु, शास्त्र आदि नाना प्रकार के जो भेद दिखाई पडते हैं, वे न आत्मस्वरूप हैं और न
आत्मज्ञान के कारण ही हैं, क्योकि आत्मस्वरूपभूत आत्मज्ञान को किसी साधन की अपेक्षा नहीं रहती,
इसी आशय से कहते हैं।
जो कुछ यह नानाविध वस्तु है, उन्हें आत्मा न समझिए ओर इन गुरु उपदेश आदि क्रमो को आत्मज्ञान
में कारण न समझिए