Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
क्रमे गुरूपदेशानां प्रवृत्ते शिष्यबोधतः ।
अनिर्देश्योऽप्यदृश्योऽपि स्वयमात्मा प्रसीदति ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
शिष्य के बोध के लिए गुरुउपदेशों का क्रम प्रवृत्त हो जाने पर
अनिर्देश्य और अदृश्य भी आत्मा उसे स्वयं अभिव्यक्त हो जाता है