Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
शास्त्रार्थैर्बुध्यते नात्मा गुरोर्वचनतो न च ।
बुध्यते स्वयमेवैष स्वबोधवशतस्ततः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह गुरु उपदेश आदि की आवश्यकता उपस्थित रहते उनमें अकारणता की उक्ति कैसे ?
इस पर कहते हैं।
यह आत्मा न तो शास्त्रार्थों से और न गुरु के वचन से ही अवगत होता है, किंतु यह स्वयं ही उक्त
अपने बोधवश से जाना जाता है