Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
गुरूपदेशशास्त्रार्थैर्विना चात्मा न बुध्यते ।
एतत्संयोगसत्तैव स्वात्मज्ञानप्रकाशिनी ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
और गुरु के उपदेशों और शास्त्रार्थों के बिना भी यह आत्मा
अवबुद्ध नहीं होता, क्योकि इन सबके संयोग की सत्ता ही स्वात्मज्ञान की अभिव्यंजक है