Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
संगतासत्यदिग्देशकालांशपरमाणुता ।
जीवतामागता भूततन्मात्रवलनाक्रमात् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रिय
मुने, ब्रह्मचिति उपाधिवश जीवभाव को प्राप्त होकर देह, इन्द्रिय आदि के संवलन-क्रम से मृगी, लता,
कीट, देव, असुर आदिरूप हो जाती है