Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 44, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
दृश्यदर्शनसंबन्धस्पन्दाभावे न जायते ।
वेदना भवदाभासा चित्रपुंसामिवाशये ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
दृश्य ओर दर्शन के सम्बन्धरूप स्पन्दन का अभाव होने पर हृदय में जगत्रूप आभास
की भावना उस प्रकार उत्पन्न नहीं होती, जिस प्रकार चित्रलिखित पुरुष के हृदय में नहीं होती