Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 47, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
नानयोर्विद्यते मेदस्तरुपादपयोरिव ।
यानीमानि जगन्तीह नान्यत्तानि चिदाकृतेः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदात्मरूप से जगत् का अस्तित्व मानने पर "जगत्" और ब्रह्म शब्द के अर्थ में भेद नहीं है, यह
कहते हैं।
जिस तरह “तर” ओर "पादप" (वृक्ष) शब्द के अर्थ में भेद नहीं है, उसी तरह “जगत्” और
“ब्रह्म” शब्द के अर्थ में भी भेद नहीं है, क्योंकि यहाँ जो जगत् दीख रहे हैं, वे सब चिदात्मा से भिन्न
अन्य कोई वस्तु नहीं हैं