Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ब्रह्माहं त्रिजगद्ब्रह्म त्वं ब्रह्म खलु दृश्यभूः ।
द्वितीया कलना नास्ति यथेच्छसि तथा कुरु ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वही कहते हैं।
मैं ब्रह्म हूँ, तीनों जगत् ब्रह्म है, आप ब्रह्म हैं और यह दृश्य पृथिवी ब्रह्म ही है; ब्रह्म से पृथक् कोई
दूसरी कल्पना ही नहीं है । इसलिए जैसा आप चाहें वैसा ही कीजिए | ("यथेच्छसि इससे यह सूचित
होता है कि ऐच्छिक व्यवहार से वास्तविक ब्रह्मरूपता में कोई हानि नहीं पहुँचती)