Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

चित्क्षेत्रे कलनाबीजं यदेतत्पतति स्फुरन् । चित्ताङ्कुरं तदेतस्माद्भाविसंसारखण्डकः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

चिद्रूपी खेत में जो यह कल्पनारूपी बीज गिरता हे, वही चित्तरूपी अंकुर होकर उससे स्फुरित होता हुआ भावी संसाररूपी जंगल का एक खण्ड तैयार हो जाता है