Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
नो चेत्पतति चित्क्षेत्रे कलनाबीजकं ततः ।
चित्ताङ्कुरा न जायन्ते सुखदुःखलवद्रुमाः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि चिद्रूप खेत में कल्पनारूपी बीज न बोया जाय तो उससे उन चित्तरूपी अंकुरों की उत्पत्ति भी न
हो, जिनसे आगे चलकर सुख-दुःखरूपी अनेक फल देनेवाले शरीररूपी वृक्ष बन जाते हैं