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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 5, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

मह्यं सत्तामुपेताय भावाभावभवार्णवात् । नमो नित्यं नमस्याय जयाम्यात्मात्मनात्मनि ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

सन्मात्ररूप ब्रह्म को प्राप्त कर चुका हूँ, चूँकि मैं अपने आपसे अपनी महिमा में सबसे बढ़-चढ़ कर विद्यमान हू, अतःसदा सबके नमस्कारयोग्य मत्स्वरूप आत्मा को नमस्कार है