Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 50, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
आकारोऽहं शरीरादि स्थावरादि चरादि च ।
नाहमाद्यश्चिदात्मेति मिथ्या ज्ञानेन चेतति ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए "आद्य चिदात्मा मेँ नहीं हूँ, किंतु शरीर आदि आकारवाला ही मैं हूँ, यों मिथ्याज्ञान
से यह देखने लगता है