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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 50, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

जानन्नपि यदेतान्वै विशेषाञ्छतधा पुनः । पृच्छामि तदशेषेण कथयस्वानुकम्पया ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि तत्त्वज्ञान से समस्त संशयो से रहित हुए आपको मायामय, सव प्रकार की अनुपपत्ति से ग्रस्त इन व्यवहारो में ऐसा संशय क्यो होता है ? तो उस पर कहते हैं। महर्षे, यद्यपि मैं इन विशेषो को जान रहा हूँ; तथापि अज्ञानियों पर अनुग्रह करने के लिए ही फिर- पिर सैकड़ों बार आपसे जो पूछता हूँ, उसे आप कृपापूर्वक पूर्णरूप से कहिए