Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अत्रैव निश्चयं बद्ध्वा नियमः सुदृढीकृतः ।
अनेनेत्थमनेनेत्थं भाव्यमित्यवखण्डितम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
सांसारिक विषयभोगों में ही पुरुषार्थ की परिसमाप्ति है, यह मत बाँधकर नश्वर सुख को
लक्ष्यकर उसने “इन लौकिक कर्मों से यह सुख होता है और इन पारलौकिक कर्मो से यह सुख होगा”
इस नियम को सुदृढ़ कर दिया है