Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
मोक्षादृते न शाम्यन्ति जीवतां चक्षुरादयः ।
उन्मज्जन्ति निमज्जन्ति केवलं देशकालतः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार अब तक जीव के वासनापरिणामस्वरूप देहादिवन्ध का वर्णन किया गया, अब उसकी
शांति कब होगी ? इस जिज्ञासा पर कहते हैं।
प्राणियों की चक्षु आदि इन्द्रिय मोक्ष के बिना शांत नहीं होती | वे देशकृत ओर कालकृत भेदो से
इस संसारसागर में उतराती ओर इबती रहती हैं