Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तिर्हि तुर्यत्वं तुर्यातीतं पदं ततः ।
बोधो जीवः प्रबोधोऽयं स च बुद्धिप्रयत्नतः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्ति ही तुरीयावस्था हे ।
उसके परे तुरीयातीत ब्रह्मपद है । तत्त्वज्ञान होने से यह जीव प्रबोधस्वरूप हो जाता है यानी उत्कृष्ट
चैतन्यात्मक ब्रह्मरूप हो जाता है और वह तत्वज्ञान या बोध पुरुष प्रयत्न से साध्य है