Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
भगवान्स यमः किंचिद्गते प्रतिचतुर्युगे ।
तपः प्रकुरुते भूतदलनात्पापशङ्कया ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
वे भगवान् यमराज, प्रति
चतुर्युग में कुछ समय समाप्त हो जाने पर या द्वापर के अन्त में-जीवों के नाश से जनित पाप की
आशंका होने से - कदाचित् कुछ तपस्या भी करते हैं