Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कदाचिदष्टौ वर्षाणि दश द्वादश वापि च ।
कदाचित्पञ्चसप्तादि कदाचित्षोडशापि च ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
यमराज की उस तपस्या मे समय का नियम नहीं है, यह कहते है ।
कभी तो आठ वर्ष, कभी दस अथवा बारह वर्ष, कभी पाँच या सात वर्ष ओर कभी सोलह वर्ष तक
भी वे तपस्या करते रहते हैँ