Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
उदासीनवदासीने तस्मिन्नियमसंस्थितौ ।
न हिनस्ति जगज्जाले मृत्युर्भूतानि कानिचित् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस यमराज के उदासीन के समान तपस्या मेँ आसीन रहने पर
संसाररूपी जाल में फँसे हुए किन्हीं जीवों का मृत्यु नाश नहीं करती