Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
विष्णोरर्जुननामादौ प्राकृतं भावमास्थितः ।
हर्षामर्षान्वितो देहो नरधर्मा भविष्यति ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
अर्जुननामधारी भगवान् विष्णु का शरीर प्राकृत भाव मेँ स्थित होकर हर्ष ओर शोक से युक्त मनुष्यधर्मा
बनेगा यानी अज्ञप्राय हो जायेगा