Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
सेनाद्वयगतान्दृष्ट्वा स्वजनान्मरणोन्मुखान् ।
विषादमेष्यत्युद्योगं युद्धाय न करिष्यति ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
दोनों सेनाओं में पहुँचे हुए और मरने के लिए तैयार अपने
बन्धुओं को देखकर वह अर्जुन विषाद को प्राप्त होगा और युद्ध के लिए उद्योग न करेगा