Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
तमर्जुनाभिधं देहं प्राप्तकार्यैकसिद्धये ।
हरिर्बुद्धेन देहेन बोधयिष्यति राघव ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
राघव, तब उस अर्जुननामक देह को, उपस्थित कार्य की सिद्धि के लिए, श्रीविष्णु भगवान् स्वतः सिद्ध
आत्मबोधवाली अपनी देह से यानी श्रीकृष्ण-देह से उपदेश देगें