Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
अन्तः सर्वशरीराणां यः सूक्ष्मोनुभवः स्थितः ।
मुक्तोऽनुभवनीयेन सोऽयमात्मास्ति सर्वगः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण शरीरों के भीतर विषय समूहों से निर्मुक्त, अतएव सूक्ष्मरूप से
जो अनुभव स्थित है, वही यह सर्वव्यापी आत्मा है