Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
मुक्ताफलशतौघानां तन्तुः प्रोतवपुर्यथा ।
तथायं देहलक्षाणां स्थित आत्मास्त्यलक्षितः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त देहो के भीतर स्थित होकर अन्तयमीरूप से उनका विधारक होने पर भी वह (आत्मा)
अलक्ष्य ही है, इसमें दृष्टान्त बतलाते हैं।
सैकड़ों मोतियों के समूहों के छिद्रों में स्थित प्रोत-आकारवाला तन्तु जैसे लक्षित नहीं होता, वैसे
ही लाखों देहों के भीतर स्थित यह आत्मा लक्षित नहीं होता