Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कर्मासक्तिमनाश्रित्य तथा नाश्रित्य मूढताम् ।
नैष्कर्म्यमप्यनाश्रित्य समस्तिष्ठ यथास्थितम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कर्मो में आसिक्त का आश्रय
न कर, तत्त्वदृष्टि में प्रमाद का आश्रय न कर और नैष्कर्म्य का भी आश्रय न कर सम होकर
यथास्थित बैठे रहो