Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 55, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 55, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 55 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।
एवमेतन्महाबाहो न किंचिन्नश्यति क्वचित् ।
आत्मैवास्त्यविनाशात्मा किं तस्य क्व विनश्यति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
नहीं होता, क्योंकि जब आत्मा अविनाशात्मा ही है, तब भला उसका कहाँ क्या विनष्ट हो सकता है ?
अर्थात् कुछ नहीं, यह भाव हे