Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 56, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 56, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
क्षणेनैव तथैवेमौ भुविस्थाविति विद्धि हे ।
अद्य क्षीणा मनोराज्ये नानानुभवनात्मनि ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
पार्थं अनेक तरह के विषयानुभववाले
मनोराज्य में क्षणिक मोह से परिकल्पित वध्यघातकभावादिरूप तुम्हारी कल्पना आज ही मेरे उपदेश
से क्षीण हो जाती है