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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

सुदुष्कृतोत्तमध्यानचारिण्यो धरणीतले । नियत्या नियतं कालं पीड्यन्ते कीटपङ्क्तयः ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

जंगम जाति में भी कृमि, कीट आदि को दुःखानुभव अधिक होता है, यह उसके कारण प्रदर्शनमुख से बतलाते हैं। भयंकर बड़े-बड़े पापों के कारण एकमात्र उनके फलों के ही उपभोग के अनुकूल ध्यान करना ही जिनका स्वभाव है, ऐसी कीटो की पंक्तियाँ इस जगतीतल में नियति के द्वारा पीड़ित होती रहती हैं