Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

करोति घुंघुमं भूरि भूतभ्रमरपेटिका । ब्रह्माण्डभैक्ष्यभाण्डेयं काली भगवती क्रिया ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

अब तत्‌-तत्‌ फलों में नियत प्राणियों की क्रिया को काली के रूप में, ब्रह्माण्ड को उसके भिक्षा के पात्ररूप मे अण्डज आदि चार तरह के प्राणियों को उसकी भिक्षा में प्राप्त द्रव्यरूप में उत्प्रेक्षित करते हैं। जिसके करकमल में ब्रह्माण्डरूपी भिक्षा का पात्र है, ऐसी भगवती कालपत्नी काली पूर्वगृहीत भूतरूपी भिक्षा का अपने पति काल को पुन: पुनः समर्पण कर दूसरी-दूसरी भूतभिक्षा ग्रहण करने की इच्छा करती है