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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 81, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । आधेः कथं भवेद्व्याधिः कथं च स विनश्यति । द्रव्यादितरया युक्त्या मन्त्रपुण्यादिरूपया ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

आधियो से (मानसिक पीडाओं से) व्याधियाँ कैसे उत्पन्न होती हैं और उनकी कैसे चिकित्सा की जाती है, यह श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं। गुरुवर, आधि से कैसे व्याधि उत्पन्न होती है और ओषध से भिन्न मन्त्र, पुण्य आदिरूप युक्ति से वह कैसे नष्ट होती है