Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 82, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 82, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 82 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अणिमादिपदप्राप्तौ ज्ञानयुक्तिरिति श्रुता ।
भवता साधुना राम युक्तिमन्यामिमां श्रृणु ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह ब्रह्माकाशता ही इसकी निरतिशय अणिमादि सर्वसज्रिद्धियाँ है, इस अभिप्राय से उपसंहार
करते हैं ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, अणिमादि पद की प्राप्ति में साधु-स्वभाव आपने इस प्रकार से ज्ञानयुक्ति तो
सुन ली, अब आप यह दूसरी युक्ति यानी दूसरे के शरीर में प्रविष्ट होकर भोग प्राप्ति कैसे होती है, यह
युक्ति सुनिये