Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 93, Verses 12–18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 93, verses 12–18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 12-18
संस्कृत श्लोक
कुम्भ उवाच ।
सर्वमेव न संत्यक्तं त्वया राजन् शिखिध्वज ।
सर्वत्यागपरानन्दे मा मुधाभिनयं कुरु ॥ १२ ॥
तवास्त्येवापरित्यक्तः सर्वस्माद्भाग उत्तमः ।
यं परित्यज्य निःशेषं परामायास्यशोकताम् ॥ १३ ॥
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इति श्रुतवता तेन किंचित्संचिन्त्य भूभृता ।
इदमुक्तं महाबाहो राम राजीवलोचन ॥ १४ ॥
शिखिध्वज उवाच ।
इन्द्रियव्यालसंघातो रक्तमांसमयाकृतिः ।
शिष्यते सर्वसंत्यागे देहो मे देवतात्मज ॥ १५ ॥
तदुत्थाय पुनर्देहं भृगुपातादविघ्नतः ।
विनाशात्मकतां नीत्वा सर्वत्यागी भवाम्यहम् ॥ १६ ॥
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्त्वा देहमग्रस्थे श्वभ्रे त्यक्तुमसौ जवात् ।
करोति यावदुत्थानं तावत्कुम्भोऽप्युवाच ह ॥ १७ ॥
कुम्भ उवाच ।
राजन्किमिति देहं त्वं निरागस्कं महावटे ।
त्यजस्यज्ञो हि वृषभः कुपितो हन्ति तर्णकम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्य पदार्थो के त्यागमात्र से, भ्रान्ति से बालक की नाई उस राजा शिखिध्वज के सर्वत्यागजन्य
सुखाभिनय को न सह रहे कुम्भ कहते हैं।
कुम्भ ने कहा : हे राजन्, शिखिध्वज, अभी आपने सभी पदार्थों का अच्छी तरह त्याग नहीं किया ।
सर्वत्यागजन्य परमानन्द में झूठ-मूठ का अभिनय मत कीजिए। सबसे उत्तम भाग का तो अभी आपने
त्याग ही नहीं किया, जिसका त्याग कर आप परम निःशेष विशोकता को प्राप्त होंगे महाराज
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे महाबाहो, हे राजीवलोचन श्रीरामजी, यह सुनकर उस महीपति ने कुछ सोचकर
यह कहा । राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, इन्द्रियरूपी दुष्ट साँपों के समूह से युक्त तथा रक्त-
मांसमय आकारवाला यह मेरा शरीर अभी सर्वत्याग में बाकी रह गया है, इसलिए फिर उठकर बिना
विघ्न के इस शरीर को भृगुपात से विनाशरूपता में पहुँचाकर मैं सर्वत्यागी हो रहा हू। महाराज वसिष्ठजी
ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, यह कहकर अपना शरीर छोड़ने के लिए सामने स्थित खन्दक में गिरने के
लिए ज्यों ही राजा शिखिध्वज उठ कर झोंक से बढ़े, त्यों ही कुम्भ ऋषि बोले | कुम्भ ऋषि ने कहा : हे
राजन्, क्यों इस निरपराधी देह को इतने बड़े भयंकर खंदक में छोड़ रहे हैं। आप तो, उस अज्ञानी क्रोधी
बैल के सदुश मालूम पड़ते हैं, जो अपने बछड़े को ही मारता है