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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 93, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 93, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

सूत्रं मुक्ताफलेनेव जगज्जालं त्रिकालकम् । सर्वमन्तः कृतं तेन येन सर्वं समुज्झितम् ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

अपरिच्छिन्न आत्मा का ग्रहण करने पर तो आप ही सब की आत्मा ठहरते है, इसलिए किसी दूसरे के द्वारा आपका त्याग न होने के कारण त्याज्यकोटि में अप्रविष्ट आप जब सर्वत्याग करने लगेंगे, तब सबको आपने अधीन बनाकर ग्रहण कर ही लिया, यह कहते हैं। जैसे मुक्ताफल सूत को अपने अन्दर कर लेता है वैसे ही जिसने सर्वत्याग किया है उसने तीनों काल के समस्त जगत्‌ को अपने भीतर कर लिया है