Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
कारणाज्जायते कार्यमहंभावाद्भवाङ्कुरः ।
इति कारणमन्विष्य कथयस्व ममाधुना ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अहम्भावरूप कारण से
मन आदि रूप संसार का अंकुर कार्य उत्पन्न होता है वैसे अपनी बुद्धि से विचार कर अहम्भावरूप कार्य
जिस कारण से होता है वह कारण अब मुझसे कहिए