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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

वेद्यवेदनरूपस्य चेत्यसंचेतनस्य मे । अकारणं कारणतां यद्यातं तव तद्वद ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

स्पष्टीकरण के लिए पूछे गये अर्थ का फिर अनुवाद करते हैं। सामान्यतः विषयज्ञान का स्वरूप ओर विशेषतः विषयज्ञान का स्वरूप-इन दोनों के प्रति मिथ्या होने से कारणता के लिए सर्वथा असमर्थ ही विषय कारणता को प्राप्त हुआ है, इसलिए यहाँ पर जो आपका अभिप्रेत कारण है, उसे कहिए