Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
चेत्यचेतनरूपस्य वेद्यसंवेदनाकृतेः ।
इयं पदार्थसत्तेह देहादि कारणं मुने ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
पूछे जाने पर राजा शिखिध्वज अपना अभिप्रेत बतलाते है ।
राजा शिखिध्वज ने कहा : हे मुने, सामान्यतः विषयज्ञान का स्वरूप ओर विशेषतः विषयज्ञान का
स्वरूप - इन दोनों के प्रति यह देह आदि बाह्य आध्यात्मिक पदार्थ-सत्ता ही यहाँ कारण है