Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
कारणेन विना कार्यं शरीरं न कदाचन ।
विद्यते यस्य नो बीजं तद्द्रव्यं क्वेव जायते ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
बिना कारण के यह शरीररूपी
कार्य नहीं रह सकता। जिस द्रव्य का बीज नहीं है उसकी उत्पत्ति कहाँ कभी होती है ?