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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 95, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 95, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

शिखिध्वज उवाच । आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं यद्ययं भासते भ्रमः । अर्थक्रियासमर्थश्च तत्कथं दुःखकारणम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

होता है, वह यदि भ्रमरूप है, तो वह अर्थक्रियासमर्थ ओर दुःख का कारण कैसे हे, भ्रमात्मक वस्तु तो अर्थक्रियासमर्थ ओर दुःख हेतु दिखाई नहीं पड़ती