Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 98, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 98, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
महाप्रलयसर्गादावेवेदं नोदितं जगत् ।
निर्देशस्त्विदमित्यत्र त्वद्बोधाय मया कृतः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में “न निरोधो न चोत्पत्तिः“ इत्यादि श्रुति का प्रमाणरूप से उद्धरण करते हैं।
प्राकृत प्रलय के अनन्तर पुराण आदि में प्रसिद्ध जो सृष्टि है, उस सृष्टि के आरम्भ में ही यह चित्त
आदि जगत् उत्पन्न नहीं है, इसलिए मैने “यह चित्त-सा मालूम” पड़ता है, इत्यादि रूप से जो कहीं-
कहीं निर्देश किया है, वह केवल आपके बोध के लिए ही किया है